"मित्रता" माया नगरी में रोज़ की तरह शाम के वक़्त बरगद के नीचे जुगनू काका की चौपाल लगी हुई थी। सभी अपनी - अपनी समस्या और सवाल जुगनू काका के सामने रख रहे थे, और जुगनू काका बड़ी शांति से सभी का उत्तर दे रहे थे। घनश्याम काफी देर से अपने भीतर एक सवाल लिए बैठा था। जुगनू काका ने घनश्याम को परेशान देख स्वयं ही पूछ लिया "कहो घनश्याम, कुछ पूछना चाहते हो।" घनश्याम बोल उठा "काका मित्रता किसे कहते है?" जुगनू काका मुस्कुराकर बोले "मित्रता, इसके लिए तो तुम्हें एक कहानी सुनानी होगी।" घनश्याम ने कहा "कहानी?" जुगनू काका ने उत्तर दिया "हाॅ कहानी, कहानी का शीर्षक ही है "मित्रता" - एक हष्टपुष्ट नौजवान एक छोटे से कमरे में रहा करता था। उस नौजवान को अपना छोटा सा कमरा भी बड़ा सा लगता था, क्योंकि उसने कभी भी बाहर की दुनिया देखी ही नहीं थी। उसका जन्म उसी छोटे कमरे में हुआ था। यहां उसके ज़रूरत का सारा सामान मौजूद था। खाना,पीना, सोने के लिए बिस्तर, पढ़ने के लिए कि...