जन्म तिथि के नक्षत्र,
समस्त योग जहाँ बहे थेे,
ब्रम्हांड ध्वनि को हम अक्षर में कहे थे,
जी हाँ, पहला अक्षर हम माँ कहे थे।

बाल अवस्था,किशोर अवस्था और वृद्ध अवस्था,
जिस ऊर्जा के सहारे रहे थे,
जिसके नज़र में,हमारे कर्म-अकर्म समान रहे थे,
जी हाँ, पहला अक्षर हम माँ कहे थे।

जीवन सूत्रधार जिसे कहे थे,
जिस पर कविताएँ लिख-लिख थक चुके थे,
हर रचना में जिसे अभिव्यक्त किये थे,
जी हाँ, पहला अक्षर हम माँ कहे थे।

भूत, भविष्य, वर्तमान जिसने रचे थे,
स्वयं समय चक्र जिसके द्वारा पाल बने थे,
मुझ पर काल के क्षण, महाकाल जिससे भयभीत हुए थे,
जी हाँ, हम पहला अक्षर माँ कहे थे।

जिसकी कृपा से मोक्ष द्वार पर आकर खड़े है,
36 करोड़ नही,हम एक देवता के भक्त रहे है,
हे विष्णु, करदे पुनर्जन्म, ताकि सदैव गर्व रहे की,
जी हाँ, पहला अक्षर हम माँ कहे थे।
 -Tushar Ramdiya

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