कुछ खोकर, कुछ होजाना


बात करते तेरा समीप आजाना,
कितना अद्भुत है,
कुछ खोकर, कुछ होजाना।

बेमतलब तेरा हाथ थामना,
तेरी सांसों का चेहरे से टकराना,
फिर दो उड़ती सांसों का मिल एक बन जाना,
कितना अद्भुत है, कुछ खोकर, कुछ होजाना।

किसी राही का बस्ता उठाना,
फिर दूर क्षितिज में डूब गोते लगाना,
मकान नहीं, अपनों का साथ ही घर हो जाना,
कितना अद्भुत है, कुछ खोकर, कुछ होजाना।

राम का सीता को वनवास पहुंचाना,
कृष्ण व राधा का साथ खोजाना,
फिर भी स्वयं को हर मंदिर, मंत्र और पूजा में पाना,
कितना अद्भुत है, कुछ खोकर, कुछ होजाना।

आकाश से जल का लहराकर आना,
धरती में समा प्यास बुझाना,
पुनः प्रकृति को हरा भरा कर जाना,
कितना अद्भुत है, कुछ खोकर, कुछ होजाना।

किसी विपत्ति में, बदनामी का आना,
आपके खास लोगो का साथ छुड़ाना,
फिर किसी रहगुजर का हाथ थाम “मित्र” बनाना,
कितना अद्भुत है, कुछ खोकर, कुछ होजाना।

जीवन का हर कदम ऐतिहातन बढ़ाना,
स्वयं को प्रति पल रोक - रोक समझाना,
फिर नए पत्तो के लिए,  टूट हवा के सहारे बहजाना,
कितना अद्भुत है, कुछ होकर, कुछ होजाना।

-Tushar Ramdiya








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